
मासूम मोहब्बत का बस इतना फ़साना है,
कागज़ की हवेली है बारिश का ज़माना है ।
क्या शर्त -ऐ -मोहब्बत है क्या शर्त -ऐ -ज़माना है,
आवाज़ भी ज़ख्मी है और गीत भी गाना है ।
उस पार उतरने की उम्मीद बहुत कम है ,
कस्ती भी पूरानी है , तूफ़ान को भी आना है ।
समझे या न समझे वो अंदाज़ मोहब्बत के ,
एक शख्स को आँखों से एक शेर सुनना है ।
भोली सी अदा , कोई फिर इश्क की जिद पर है ,
फ़िर आग का दरिया है और डूब कर जाना है ...
कागज़ की हवेली है बारिश का ज़माना है ।
क्या शर्त -ऐ -मोहब्बत है क्या शर्त -ऐ -ज़माना है,
आवाज़ भी ज़ख्मी है और गीत भी गाना है ।
उस पार उतरने की उम्मीद बहुत कम है ,
कस्ती भी पूरानी है , तूफ़ान को भी आना है ।
समझे या न समझे वो अंदाज़ मोहब्बत के ,
एक शख्स को आँखों से एक शेर सुनना है ।
भोली सी अदा , कोई फिर इश्क की जिद पर है ,
फ़िर आग का दरिया है और डूब कर जाना है ...
4 comments:
Panktiya aacahi h....
फ़िर आग का दरिया है और डूब कर जाना है ...
wah. achhi lagi rachna. vinod ji k.v. jhunjhunu ke student ho?
रचना मौलिक नहीं है कहीं से चुराई गई है !
इस लिए बधाई के पात्र भी हम नहीं है !
शायरा अना देहलवी😍
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